क्या आपके मन में भी यही सवाल है कि दिवाली की रात मां लक्ष्मी को खुश करने के लिए आखिर कितने दीपक जलाने चाहिए और उन्हें घर के किस कोने में रखना सही रहता है? अगर आप भी हर साल इसी कन्फ्यूजन में रहते हैं, तो परेशान मत होइए। आज हम आपकी इस उलझन को बिल्कुल दूर कर देते हैं।
दीपावली (लक्ष्मी पूजन) के दिन, जो कि इस साल 8 नवंबर 2026, रविवार को है, मुख्य रूप से घर के मंदिर में कम से कम 11 या 21 घी के दीपक जलाने की परंपरा है। इसके अलावा, घर के मुख्य द्वार, तुलसी के पास, छत पर और बालकनी में सरसों के तेल के दीपक जलाए जाते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है और मां लक्ष्मी का वास बना रहता है। आइए, इसे थोड़ा विस्तार से समझते हैं।
लक्ष्मी पूजन के समय दीपकों की सही संख्या और उनका महत्व
जब आप पूजा की थाली तैयार करती हैं, तो मन में यह सवाल जरूर आता होगा कि क्या कोई निश्चित संख्या होनी चाहिए? देखिए, शास्त्रों और पुरानी मान्यताओं के अनुसार, पूजा में एक अखंड दीप (जो पूरी रात जलता रहे) जलाना सबसे शुभ माना जाता है। इसके साथ ही, आप अपनी श्रद्धा के अनुसार 11, 21 या 51 दीपक जला सकती हैं।
कुछ लोग परिवार के सदस्यों की संख्या के हिसाब से भी दीपक जलाते हैं। मुख्य बात यह है कि मन में श्रद्धा होनी चाहिए। गिनती को लेकर बहुत ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है, बस इतना ध्यान रखें कि घर का कोई भी कोना अंधेरे में न रहे।
किस दिशा में रखें कौन सा दीपक?
दीपक जलाने के साथ ही उसकी दिशा का सही होना भी बहुत जरूरी है, ताकि घर में बरकत बनी रहे। वास्तु शास्त्र के जानकारों की मानें तो दीपकों की दिशा तय करने के कुछ खास नियम होते हैं:
- घर का मुख्य द्वार: परंपरा में मुख्य द्वार के दोनों ओर दीपक रखना अधिक प्रचलित है। एक ही दीपक रखना हो, तो अपने परिवार की परंपरा के अनुसार स्थान चुन सकते हैं। इससे घर में नकारात्मक शक्तियां प्रवेश नहीं करतीं।
- पूजा घर: मां लक्ष्मी और गणेश जी के सामने रखा घी का दीपक हमेशा भगवान के दाहिने हाथ की ओर होना चाहिए।
- दीपक की लौ: पूजा का दीपक पूर्व दिशा की ओर मुंह करके जलाना सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि इससे आयु और आरोग्य में वृद्धि होती है। अगर आप धन लाभ चाहती हैं, तो उत्तर दिशा की ओर मुख करके भी दीपक जला सकती हैं।
दीपावली पर दीपक जलाते समय किन बातों का रखें खास ध्यान?
त्योहार का दिन है और हम सब चाहते हैं कि सब कुछ मंगलमय हो। इसलिए थोड़ी सी सावधानी बरतना बहुत जरूरी है, ताकि किसी तरह की अनहोनी से बचा जा सके।
- दीपक की सुरक्षा: तेल या घी से भरे दीपकों को हमेशा जमीन पर किसी थाली या लकड़ी के पाटे पर रखें। इन्हें पर्दों, कपड़ों या लकड़ी के भारी सामान के बिल्कुल पास न रखें।
- हवा का ध्यान: अगर आपने दीयों को बालकनी या खिड़की के पास रखा है, तो तेज हवा से लौ बुझने का खतरा रहता है। इसलिए उन्हें ऐसी जगह रखें जहां वे सुरक्षित रहें।
- बच्चों की पहुंच: घर में छोटे बच्चे हैं, तो जलते हुए दीपकों को उनकी पहुंच से थोड़ी दूर ही रखें।
दीपावली के इस पावन पर्व पर आप अपनी दीवाली पर लक्ष्मी-गणेश पूजा की पूरी सामग्री सूची पहले से ही तैयार कर लें, ताकि ऐन वक्त पर भागदौड़ न करनी पड़े।
याद रखिए, ये सारी बातें और नियम हमारी पुरानी परंपराओं और मान्यताओं का हिस्सा हैं। इनका मुख्य मकसद घर में रोशनी करना, साफ-सफाई रखना और अपनों के साथ मिलकर खुशियां बांटना है। किसी भी तरह की अंधविश्वास भरी बातों में पड़ने की बिल्कुल जरूरत नहीं है।
इस शुभ दिन का सही समय क्या है?
अगर आप जानना चाहती हैं कि पूजा का सबसे सही समय कब है, तो पंचांग के अनुसार इस साल दीपावली (लक्ष्मी पूजन) 8 नवंबर 2026 को है। इस दिन का प्रदोष काल शाम 17:44 से रात 20:08 तक रहेगा। यह समय मां लक्ष्मी की आराधना के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है, इसलिए अपने यहां के पंडित जी या स्थानीय समय का भी ध्यान रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
क्या टूटे हुए दीये का इस्तेमाल पूजा में कर सकते हैं?
नहीं, पूजा में हमेशा साफ, साबुत और नए मिट्टी के दीयों का ही इस्तेमाल करना चाहिए। टूटे या चटके हुए दीये शुभ नहीं माने जाते हैं।
क्या रातभर तेल का दीपक जलाकर रखना सुरक्षित है?
अगर आप रातभर अखंड दीपक जलाना चाहती हैं, तो सुनिश्चित करें कि उसमें पर्याप्त मात्रा में घी या तेल हो और वह किसी सुरक्षित व खुले स्थान पर रखा हो, जहां हवा से कोई कपड़ा न उड़कर आए।
क्या हम स्टील या पीतल के दीयों का इस्तेमाल कर सकते हैं?
बिल्कुल, मिट्टी के दीयों के अलावा आप अपने घर के मंदिर में पीतल या तांबे के दीयों का भी उपयोग कर सकती हैं। ये साफ-सुथरे और टिकाऊ होते हैं।
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