कार्तिक अमावस्या 2026: लक्ष्मी पूजा से पहले ये जरूर जानें

कार्तिक अमावस्या कब है 2026 में? अगर आप भी यही सवाल पूछ रहे हैं, तो इसका जवाब है 9 नवंबर 2026, सोमवार। लेकिन एक बात ध्यान से समझ लीजिए। इस साल दिवाली और लक्ष्मी पूजा 8 नवंबर 2026, रविवार को है। यानी कार्तिक अमावस्या और दिवाली की पूजा की तारीख अलग-अलग दिखाई दे रही है।

अब आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि जब दिवाली अमावस्या से जुड़ी है, तो लक्ष्मी पूजा एक दिन पहले क्यों? कहीं पूजा की तारीख गलत तो नहीं समझ रहे?

परेशान होने की जरूरत नहीं है। पंचांग में सूर्योदय की तिथि और शाम के पूजा समय को अलग-अलग देखा जाता है। बस यही अंतर समझ लेंगे, तो घर में पूजा की तैयारी करते समय उलझन नहीं होगी।

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कार्तिक अमावस्या 2026 में 9 नवंबर को है, फिर लक्ष्मी पूजा 8 नवंबर को क्यों?

महिला मेज पर खुला हिंदू पंचांग ध्यान से देख रही है। पास में पीतल की पूजा थाली और एक बुझा हुआ दीपक रखा है।
कार्तिक अमावस्या 2026 में 9 नवंबर को है, फिर लक्ष्मी पूजा 8 नवंबर को क्यों?

सबसे पहले एक छोटी-सी बात समझिए। हमारे त्योहारों की तारीखें केवल अंग्रेजी कैलेंडर देखकर तय नहीं होतीं। इनके लिए पंचांग की तिथि और पूजा का समय भी देखा जाता है।

यही वजह है कि कभी-कभी किसी त्योहार की पूजा एक दिन होती है, जबकि अमावस्या की तिथि अगले दिन सूर्योदय के समय दिखाई देती है।

अमावस्या और लक्ष्मी पूजा की तारीख में अंतर कैसे समझें?

2026 के पंचांग कैलेंडर के अनुसार, 8 नवंबर को सूर्योदय के समय कृष्ण चतुर्दशी है। इसी दिन दीपावली और लक्ष्मी पूजन रखा गया है।

वहीं 9 नवंबर को सूर्योदय के समय कृष्ण अमावस्या है। इसलिए कार्तिक अमावस्या की तारीख 9 नवंबर दिखाई गई है।

यहाँ एक जरूरी बात है। सूर्योदय के समय जो तिथि चल रही हो, जरूरी नहीं कि वही तिथि पूरे दिन और शाम तक रहे। हिंदू पंचांग में तिथि दिन के बीच भी बदल सकती है।

दिवाली की लक्ष्मी पूजा के लिए प्रदोष काल का खास महत्व माना जाता है। इसलिए केवल यह देखकर कि अमावस्या किस दिन सूर्योदय पर है, लक्ष्मी पूजा का दिन तय नहीं करना चाहिए।

आपके लिए आसान तरीका यही है कि दीपावली की पूजा के लिए दी गई तारीख और प्रदोष काल देखें। अमावस्या की सूर्योदय वाली तारीख को उससे अलग समझें।

दिवाली 2026 में लक्ष्मी पूजा कितने बजे करें?

दिए गए उज्जैन पंचांग कैलेंडर के अनुसार लक्ष्मी पूजन की जानकारी इस प्रकार है।

जरूरी जानकारी तारीख और समय
दीपावली और लक्ष्मी पूजा 8 नवंबर 2026, रविवार
सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी
सूर्योदय सुबह 06:35 बजे
सूर्यास्त शाम 17:44 बजे
प्रदोष काल शाम 17:44 से 20:08 बजे

यानी घर में लक्ष्मी पूजा की तैयारी आप 8 नवंबर के अनुसार रखें। इस कैलेंडर में शाम 17:44 से 20:08 बजे तक प्रदोष काल दिया गया है।

ध्यान रखिए, यह पूरा प्रदोष काल है। इसे किसी एक विशेष लग्न या अलग से बताए गए सटीक लक्ष्मी पूजन मुहूर्त के बराबर नहीं समझना चाहिए।

स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए अपने शहर और परिवार की परंपरा के अनुसार पूजा का समय भी देख लें।

दिवाली से भाई दूज तक कौन-सा त्योहार किस दिन है?

लकड़ी की मेज पर दिवाली के लिए दीपक, मिठाइयां, पूजा सामग्री और उपहार अलग-अलग थालियों में सजाकर रखे हैं।
दिवाली से भाई दूज तक कौन-सा त्योहार किस दिन है?

दिवाली के आसपास कई त्योहार लगातार आते हैं। धनतेरस, छोटी दिवाली, लक्ष्मी पूजा, गोवर्धन पूजा और भाई दूज की तारीखें याद रखना कभी-कभी मुश्किल हो जाता है।

इसलिए घर की तैयारी करने से पहले ये तारीखें एक जगह देख लीजिए।

त्योहार तारीख सूर्योदय के समय तिथि
धनतेरस 6 नवंबर 2026, शुक्रवार कृष्ण द्वादशी
छोटी दिवाली (नरक चतुर्दशी) 8 नवंबर 2026, रविवार कृष्ण चतुर्दशी
दीपावली (लक्ष्मी पूजन) 8 नवंबर 2026, रविवार कृष्ण चतुर्दशी
कार्तिक अमावस्या 9 नवंबर 2026, सोमवार कृष्ण अमावस्या
गोवर्धन पूजा 10 नवंबर 2026, मंगलवार शुक्ल प्रतिपदा
भाई दूज 11 नवंबर 2026, बुधवार शुक्ल द्वितीया

गोवर्धन पूजा की तारीख को लेकर भी थोड़ा अंतर मिल सकता है। इस कैलेंडर में यह 10 नवंबर को है, जबकि कुछ पंचांगों में 9 नवंबर 2026, सोमवार दिया गया है।

धनतेरस का प्रदोष काल 6 नवंबर को शाम 17:45 से 20:09 बजे तक दिया गया है।

इन तारीखों को देखकर आप पूजा का सामान, घर की सफाई और परिवार के साथ त्योहार मनाने की तैयारी पहले से कर सकते हैं।

लक्ष्मी पूजा से पहले घर में किन बातों का ध्यान रखें?

दिवाली की तैयारी में घर की सफाई, सजावट, मिठाई और खरीदारी के बीच पूजा की छोटी-छोटी बातें छूट जाती हैं।

इसलिए बेहतर होगा कि पूजा की चीजें पहले ही एक जगह रख लें।

सबसे पहले पूजा की चौकी और उसके आसपास की जगह साफ कर लीजिए। फिर दीपक, बाती, तेल या घी, फूल और बाकी जरूरी सामग्री अलग रख दें। ऐसा करने से पूजा के समय बार-बार सामान ढूंढना नहीं पड़ेगा।

अगर पूजा घर में पुराने फूल, खराब सामान या टूटी हुई सजावट रखी है, तो उसे भी देख लें। सफाई करते समय किसी पूजनीय वस्तु को बिना सोचे-समझे फेंकने के बजाय परिवार की परंपरा के अनुसार उसका सम्मानपूर्वक निपटान करें।

पूजा घर की चीजों को लेकर कई तरह की मान्यताएं भी प्रचलित हैं। आप चाहें तो पूजा घर में किन चीजों को रखने से बचने की सलाह दी जाती है इस बारे में भी पढ़ सकते हैं। लेकिन किसी वस्तु के घर में होने से अनहोनी जरूर होगी, ऐसा मानकर डरने की जरूरत नहीं है।

एक और बात, दिवाली के दिन हर काम अकेले करने की जिम्मेदारी अपने ऊपर मत लीजिए। घर के दूसरे सदस्यों की भी मदद ले सकते हैं। त्योहार खुशी से मनाने के लिए है, थककर परेशान होने के लिए नहीं।

क्या अमावस्या के दिन पूजा न करने से कोई नुकसान होता है?

अमावस्या को लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल रहते हैं। कोई इसे पूजा और प्रार्थना का खास दिन मानता है, तो कोई इस दिन कुछ काम करने से बचता है।

धार्मिक मान्यता है कि कार्तिक अमावस्या पर दीपदान, प्रार्थना और दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। कई परिवार अपनी पुरानी परंपरा के अनुसार इस दिन पूजा-पाठ करते हैं।

लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि किसी कारण से पूजा न कर पाने पर आपके घर में कोई नुकसान जरूर होगा।

अगर आप नौकरी करते हैं, छोटे बच्चों की देखभाल करते हैं या घर में किसी की तबीयत ठीक नहीं है, तो अपनी सुविधा के अनुसार पूजा कर सकते हैं।

पूजा के लिए महंगी सामग्री खरीदना भी जरूरी नहीं है। श्रद्धा, साफ-सफाई और शांत मन से की गई साधारण प्रार्थना का अपना महत्व है।

इसी तरह लक्ष्मी पूजा को केवल धन मिलने की उम्मीद से जोड़ना भी ठीक नहीं। मां लक्ष्मी की पूजा सुख-समृद्धि की कामना से की जाती है, लेकिन पूजा करने से आर्थिक लाभ की गारंटी नहीं मिलती।

अगर आप लक्ष्मी पूजा की प्रचलित सावधानियों के बारे में पढ़ना चाहते हैं, तो मां लक्ष्मी की पूजा में किन गलतियों से बचना चाहिए यह जानकारी भी देख सकते हैं। ऐसी बातों को धार्मिक मान्यता के रूप में ही समझें।

कार्तिक अमावस्या को लेकर आपके मन में ये सवाल भी हो सकते हैं

क्या छोटी दिवाली और लक्ष्मी पूजा 2026 में एक ही दिन हैं?

जी हाँ। दिए गए कैलेंडर के अनुसार नरक चतुर्दशी यानी छोटी दिवाली और दीपावली का लक्ष्मी पूजन, दोनों 8 नवंबर 2026, रविवार को हैं।

हालाँकि दोनों त्योहारों से जुड़ी परंपराएं अलग हैं। इसलिए परिवार में जो रीति चली आ रही है, उसके अनुसार तैयारी कर सकते हैं।

क्या 9 नवंबर को भी लक्ष्मी पूजा करनी चाहिए?

इस कैलेंडर में दिवाली का मुख्य लक्ष्मी पूजन 8 नवंबर को रखा गया है। इसलिए केवल 9 नवंबर को सूर्योदय पर अमावस्या होने के कारण मुख्य दिवाली पूजा की तारीख बदलने की जरूरत नहीं है।

हाँ, अगर आपके परिवार में कार्तिक अमावस्या के दिन अलग से प्रार्थना, दीपदान या पूजा करने की परंपरा है, तो उसका पालन कर सकते हैं।

लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां कहाँ रखें?

घर में पूजा के लिए एक साफ, सुरक्षित और शांत जगह चुनें। जहाँ दीपक जलाने से पर्दों, कपड़ों या दूसरी चीजों में आग लगने का खतरा न हो।

मूर्तियों की व्यवस्था को लेकर परिवारों में अलग-अलग मान्यताएं मिलती हैं। इस विषय पर आप पूजा घर में मूर्तियों को साथ रखने की प्रचलित मान्यताएं भी पढ़ सकते हैं।

लेकिन किसी खास व्यवस्था को सुख-समृद्धि की गारंटी या अनिष्ट का पक्का कारण न मानें।

क्या दिवाली की पूजा के लिए महंगे सामान जरूरी हैं?

नहीं। आप अपने घर की जरूरत और बजट के अनुसार पूजा की तैयारी कर सकते हैं।

धार्मिक मान्यता में पूजा के समय श्रद्धा और साफ मन को महत्व दिया जाता है। इसलिए केवल दूसरों को देखकर महंगी सजावट या जरूरत से ज्यादा सामान खरीदने का दबाव न लें।

आखिर में बस इतनी बात याद रखिए। 2026 में कार्तिक अमावस्या 9 नवंबर, सोमवार को है, लेकिन दिवाली की लक्ष्मी पूजा 8 नवंबर, रविवार को रखी गई है। दोनों तारीखों में अंतर देखकर घबराने की जरूरत नहीं है।

त्योहार की तैयारी करते समय सूर्योदय की तिथि और पूजा के प्रदोष काल को अलग-अलग समझिए। फिर परिवार के साथ आराम से, अपनी परंपरा और सुविधा के अनुसार दिवाली मनाइए।

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